स्वास्थ्य कैंसर चौथे चरण का उपचार और रोकथाम

कैंसर का चौथा स्टेज सबसे खतरनाक माना जाता है. इस स्टेज तक आते-आते कई मरीजों की मौत तक हो जाती है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इस स्टेज में आकर भी मरीज का सही इलाज हो सकता है.

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Highlights
  • चौथे स्टेज में भी कैंसर को हरा सकते हैं आप, एक्सपर्ट से जानें कैसे ?
  • कैंसर के खतरनाक केस पर स्टडी
  • क्या चौथे स्टेज में कैंसर का इलाज संभव है?

6th July 2023, Mumbai: कैंसर का चौथा स्टेज काफी खतरनाक माना जाता है. कुछ लोग तो यह भी मानते हैं कि इस स्टेज पर कैंसर का इलाज नामुमकिन है. कई मरीजों की तो इस स्टेज तक आते-आते मौत तक हो जाती है लेकिन डॉक्टरों की माने तो अगर एडवांस स्वास्थ्य सुविधाएं हैं तो इस स्टेज में भी कैंसर का इलाज संभव है. मतलब खतरनाक और जानलेवा कैंसर (Cancer Fourth Stage Treatment) से छुटकारा मिल सकता है. आइए जानते हैं चौथे स्टेज पर कैंसर के इलाज को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स…

कैंसर के खतरनाक केस पर स्टडी

दरअसल, कैंसर का चौथे स्टेज में इलाज संभव है, ये बात डॉक्टर गुरुग्राम के सीके बिरला अस्पताल में आए एक केस को देखकर कह रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मरीज एक नहीं कई अस्पतालों में इलाज करवा चुका था लेकिन उसकी सेहत में किसी तरह का सुधार नहीं हुआ. प्राथमिक जांच में पाया गया था कि वह टॉक्सिमिया की स्थिति में था और कैंसर का विकास उसमें तेजी से हो रहा था. इसकी वजह से मरीज की सेहत दिन बीतने के साथ गिरती जा रही थी. जब अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और  डॉक्टरों की टीम ने इसकी जांच की तो उसे ICU में एडमिट कराया. मरीज की इम्यूनिटी काफी कम होने के चलते उसमें फंगल इंफेक्शन और कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया था. उसकी प्लेटलेट्स भी लगातार कम हो रही थी और इंट्राक्रैनील हेमरेज का खतरा भी उसे था.

क्या चौथे स्टेज में कैंसर का इलाज संभव है

सीनियर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार, अगर सही तरह से इलाज, दवाईयां और थेरेपी का इस्तेमाल हो तो चौथी स्टेज में भी कैंसर का इलाज हो सकता है. डॉक्टरों की टीम ने इस मरीज का इलाज करते समय सबसे पहले फीवर न्यूट्रोपेनिया का ट्रीटमेंट स्टार्ट किया. चूंकि उसकी हालत लगातार खराब हो रही थी, छाती, पेट और यूरीन में भी इंफेक्शन था. यह डॉक्टरों के लिए ज्यादा चिंता वाली बात थी. उसके शरीर में एंटीबायोटिक रोधी बैक्टीरिया पहले से ही मौजूद होने के चलते एंटीबायोटिक भी काम नहीं कर रहा था. ऐसे में हाईटेक और साक्ष्य आधारित दवाईयों से उसका इलाज किया गया और करीब एक महीने तक उसकी देखभाल की गई.

क्या एडवांस तरीके से इलाज का फायदा मिला

गुरुग्राम के सीके बिरला अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि जब मरीज की जांच की गई तो उसमें कैंडिडा पाया गया था. यह एक तरह का फंगल इंफेक्शन है. इससे बचने के लिए मरीज को एम्फोटेरिसिन दी गई. उसकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है.

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